me … the poet ..!!

20 Jun

As everyone is trying their hands on poetry .. i thought of pulishing some of mine… actually one of mine ..

i worte it long time back … guess i was in 8th tht time …

neways njoy the poem…

NOTE:- use Internet Explorer … !!

एक दिन सुबह सवेरे
टहलने निकले हम घर से,
टहलना तो बहाना था
चोव्राहे के हलवाई से
जलेबी कचोडीं जो खाना था
मन था प्रफुल्लित
गुनगुना रहे थे गाना !!

तभी सामने से हुआ
एक फटे हाल प्राणी का आना,
अरे यह तो हैं IBA के हेड
अभी तक तो फील good था हमें
अब होने लगा फील bad

उनको देख कर हम घबराने लगे
पॄआण गले तक आने लगे
ढून्द्ने लगे पतली गली भागने को,
सोच रहे थे Idea पैसे बचने को,
पर हाय रे फूटी किस्मत
उन्होने हमें देख लिया
और आकर हमको घेर लिया

अब हम असहाय थे खडे
तभी वह बोल पडे
जिस भगवान् को मानते हो भैया
उसी के नाम पेर दे दो एक रुपैया

हमने बात को टाला
एक जुमला उछाला
बोलेमाफ़ कर दो भाई
सुनते ही उनकी आँखें निकल आयीं
बोलेमाफ़ तो हम कर देंगे
पर पहले रोकड़ा लेंगे

जब पीछा छूटता ना दिखा तो
हमने बात को और टाला
एक और dialogue डाला
बोले – “पैसे रहे उधर
बाद मैं ले लेना यार

इस बात पर वो भड़के
बोले – ” तभी तो हैं हम क्ड़्के
इसी कारण तो हमारा
बँटा धार हो gaya है
इस पांच दुस रुपये कि उधरी में
अभी तक लाखों का नुकसान हो गया है !!”
PS:- I know i know… it ends with the most common fatta .. of tht time….

PS:– My, first Non-senti poem …

PS:— Last post … created a big debate .. which is still goin on ..!!

PS:—- 2000 visitors in last 5 days. all thanks to Dataquest … !!

PS:—– Came across this uber kewl flash game  KISSMAT .. just try it out.

PS:—— There are few more crappy poems in store, but i thought one slow poisioning is better then sudden death :p.

PS:——- About the post on bet … will write it as soon as I get my hands over the pics … :D!!

PS:——– End of the PS..

PS:——— End of the post

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3 Responses to “me … the poet ..!!”

  1. उन्मुक्त June 20, 2007 at 2:21 pm #

    देवनागरी में इतना अच्छा लिखते हैं। इसी में क्यों नहीं लिखते।

  2. raviratlami June 20, 2007 at 3:22 pm #

    “…NOTE:- use Internet Explorer … !!…”

    क्यों भाई? मैं ऑपेरा इस्तेमार करता हूँ. इसमें कोई समस्या नहीं है, बल्कि यह कई मामलों में ie से बढ़िया है!

    जैसा कि उन्मुक्त जी ने कहा, हिन्दी में ही लिखिए. नियमित हिन्दी लेखन के लिए शुभकामनाएँ. 🙂

  3. Ankit June 20, 2007 at 4:29 pm #

    श्री उन्मुक्त जी एव शिर रविरात्लम जी, धन्यवाद आपकी टिप्पनिओं के लिए।

    अंग्रेजी भाषा मैं अपनी पकड़ अच्छी करने के उद्धेशेय से मैंने blogging आरंभ करि थी। कुछ साथियों को देख केर हिंदी मैं लिखने कि सोची।
    आपके ब्लोग पढ़ केर लगा कि अभी अभी हिंद मैं लिखने वाले बाक़ी हैं । बस अब तो इस blog में काफी posts आने वाली हैं हिंदी में।

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