स्वयं लिखी कु्छ पुरानी कवितायेँ !!

3 Sep

(For Devnagri(hindi script) :- use IE or Opera to read)

आज अपने कमरे कि सफाई करते समय, अनायस ही मेरे हात मेरी पुरानी, धूल मैं सनी किताब लगीपन्ने पलटते हुए, मेरी दृष्टि, अपने द्वारा लिखी हुई कुछ पुरानी कविताओं पर गयी

अचानक यह तीन वर्ष सदियों कि तरह लगने लगेखैर, उन्ही मैं से दो को मैंने यहाँ जगह दे दी

( aaj apne kamre ki safayi kerte samay, anayas hi mera haat meri purani, dhool main sani kitab lagi । panne platte hue, meri drishti, apne dwara likhi hui kucch purani kavitaon per gayi।

achanak yeh teen varsh sadiyon ki tarah lagne lage। khair, unhi main se do ko main yahan jagah de di। )
। । जाने कहॉ । ।

जाने कहॉ चलता जा रह हूँ,
रह का तो ध्यान नही है
अपनी तारीफ सबको देता हूँ ,
जबकि मेरी कोई पहचान नही है

देखा बहुत कुछ ,
चाहा कुछकुछ
पर सबकुछ पाने,
का अरमान नही है


दिल मैं हैं कुच्छ इच्छाएं,
चाहता हूँ कुच्छ केर दिखाएँ
पर अभी तक मन से जरी
हुआ यह फरमान नही है

झुक कर प्रणाम किया बडों को,
इज़्ज़त दी है मैंने सबको
पर किसी के लिए मन मैं ,
मेरे झूठा सम्मान नही है

हर मोड़ पे हर कदम पर,
इंतज़ार है हमसफ़र का
पर मेरी जिन्दगी मैं ,
आया वो मेहमान नही है

ख्वाहिश है सबसे प्यार कि,
चाहता हूँ बाटना सबको प्यार
पर मेरे पास प्यार वाला ,
cupid का तीर कमान नही है

कहना बहुत कुच्छ है,
पर शब्द नही मिल रहे
अखिर हर बात को शब्दों मैं,
पिरो पाना आसान नही है

( । । jaane kahan। ।

Jane kahan chalta jaa raha hoon,
raha ka to dyahan nahi hai
Apni tarif sabko deta hoon ,
jabki meri koi pehchan nahi hai

Dekha bahut kuch ,
chaha kuch-kuch
per sabkuch pane,
ka armaan nahi hai


Dil main hain kucch ichhayen,
chahata hoon kucch ker dikhayen
per abhi tak man jari
hua yhe farman nahi hai

Jhuk ker pranam kiya badoon ko,
Izzat di hai maine sabko
per kisi ke liye man main ,
mere jhootha samman nahi hai


Har mod pe har kadam per,
intezaar hai hamsafar ka
per meri zindagi main ,
aaya vo mehman nahi hai


Kwahish hai sabse pyar ki,
chahata hoon baatna sabko pyar
per mere paas pyar vala ,
cupid ka teer kamaan nahi hai

Kehna bahut kucch hai,
par shabd nahi mil rahe
akhir har baat ko sabdoon main,
piro paana aasaan nahi hai

)

। । मैं । ।

चलता कहीँ को हूँ,
पहुंच कहीँ जाता हूँ मैं

जो चाहा वो नहीं मिल,
जो मिला उसे चाह नहीं पाता हूँ मैं

कभी सबसे बेशर्म,
कभी खुद से शरमाता हूँ मैं

कर देता हूँ परयों को क्षमा,
कभी अपनों से झगड़ जाता हूँ मैं

कभी बहुत हूँ मितभाषी,
कभी वाचाल बन जाता हूँ मैं

मेरा ह्र्यद्य क्या चाहता है,
बस यही समझ नही पाता हूँ मैं

कहते हैं वो
मुझे समझना सरल नहीं,
बस इसी बात पर
उनसे एकमत हो पाता हूँ मैं

( । । main । ।

chalta kahin ko hoon,
pahunch kahin jaata hoon main ।

jo chaha vo nahin mila,
jo milaa use chah nahin paata hoon main ।

kabhi sabse besharm,
kabhi khud se sharmata hoon main ।

ker deta hoon parayon ko kshma,
kabhi apno se jhagad jaata hoon main ।

kabhi bahut hoon mitbhashi,
kabhi vaachal ban jaata hoon main ।

mera hrydya kya chahta hai,
bas yahi samajh nahi paata hoon main ।

kehte hain vo
mujhe samajhna saral nahin,
bas isi baat per
unse ekmat ho paata hoon main
। )

PS :- ADZAP मैं प्रथम पुरस्कार मिलासन्डे कार्निवल rocks। (stood 1st in AD-ZAP (me, chauhan, vajpai & harry), and participated in other events too… all in all … this Sunday carnival was fun)


PS
:– BTP viva निकट, मेरा बुरा समय प्रारम्भ हो चुक है । (BTP viva on 10th, what am i gonna do 😦 )

PS :— क्या कोई हमारे मेस्स्कोम्स को दाल और सब्जी के बीच मैं अंतर बता सकता है। (can any one explain our messcoms the difference b/w pulses and vegetable curry).
PS :—- अखिर कार एक अच्छा FPS गेम खेलने कि मेरी इच्छा पूरी हुई। (finally, i found a good FPS game, which work on my PC )

PS :—– हम हिंग्लिश के कितने आदि हैं, यह आभास मुझे अब हो रह है। (Now I realized how addicted we are to Hinglish)

PS :—— अच्छा बंधुओं, नमस्ते !! (Ok Bye)

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16 Responses to “स्वयं लिखी कु्छ पुरानी कवितायेँ !!”

  1. हिमांक शर्मा September 3, 2007 at 3:53 pm #

    आपकी कविताएँ पढ़ीं | उत्तम लिखा है| हिन्दी में कविताएँ पढ़ के हार्दिक खुशी होती है | दिल में उम्मीद रहती है की हमारी मात्र भाषा और राष्ट्र भाषा अभी भी जिंदा है | हर जगह अंग्रेज़ी साहित्य ही देखने को मिलता है | मेरी भी कोशिश होगी की कभी हिन्दी कविता लिखूं | देखते हैं की मेरा ये प्रयास सफल होगा या नहीं |

  2. Maruti Borker September 3, 2007 at 6:25 pm #

    which FPS game are u playin ????

  3. Piyush September 3, 2007 at 8:26 pm #

    Excellent…bahut achcha likha hai…keep writing…

  4. Ankit September 4, 2007 at 4:19 pm #

    @himank ..
    dhanyavaad .. 🙂

    @ maruti
    return to castle wolfenstine

    @piyush
    thanku 🙂

  5. kirti September 5, 2007 at 7:28 am #

    IE/Opera not required. Works with Mozilla..atleast for me.

  6. Sunanda September 7, 2007 at 9:17 am #

    hey ur poems are nice, specially the ‘main’ one… 🙂

  7. Ankit September 7, 2007 at 10:05 am #

    @kirti
    actually mozilla dosent display it properly ..

    @Sunanda
    thanku 🙂

  8. Meghna September 10, 2007 at 7:59 pm #

    Hey…nice poems especially ‘main’ 🙂
    Hope u will write more 🙂 and post the other poems frm ur diary 🙂

  9. bhuwan October 15, 2007 at 8:58 pm #

    bahut accha likha hai … “main” to bahut hi pasand aayee mujhe

  10. dark-knight October 27, 2007 at 4:39 am #

    very well written !! please post more from your “dhul sani diary”.

  11. sanjay December 19, 2007 at 10:18 am #

    I m really very very happy to read all the aforesaid shayari as it was very stunning …

    I hope you would write more shero- shayri on this page further .

    Thank you ..

  12. Brijmohan shrivastava April 6, 2008 at 12:07 am #

    सरजी== में== नामक कविता में तो जो भावाव्यक्ति की है वह तो गजब की है /इसको रहस्य वाद कहें छायावाद कहें में इतना तो समझ नहीं पाता ताहम कहीं चलना और कहीं पहुँच जाना -अचाहत मिले और चाहत न मिले कभी अपनों से झगड़ना और दूसरों को मुआफ कर देना -कभी ख़ुद से शर्मा जाना में सत्य कह रहा हूँ पढ़ कर भाव बिभोर हो गया /इस वक्त सुबह का सबा पांच बज रहा है आज का पूरा दिन मेरा सुखद निकलेगा /मेरे सोभाग्य से अचानक आपकी कविता पर क्लिक हो गया -कुछ और नई कविताओं से मुझे आनंदित कर सकें तो आपकी बडी मेहरबानी होगी /धन्यवाद /

  13. Ankit April 7, 2008 at 6:30 pm #

    @meghna , bhuwan , dark-knight
    thanks a lot 🙂 , dooh sani diary milte hi baaki ki kavitayen yahan chep doonga 🙂

    @sanjay
    thanks but these are kavitayen … shayari is entirely different from it.

    @brijmohan
    overwhelmed with your comment, never thought my little piece would be so much appreciated. I’ll definitely try to put more them here.

  14. sahastrafun May 10, 2010 at 9:36 am #

    कहते हैं वो
    मुझे समझना सरल नहीं,
    बस इसी बात पर
    उनसे एकमत हो पाता हूँ मैं ।

    sir line bahut hi achhhi lagi hai mujhako.

    prateek
    8890786000

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